Vishnu Gupta Acharya
सही काम में डूबना ऐसा होता है…
जैसे कोई पर्वतारोही चोटी पर ही सो जाए…
जैसे कोई खोजी हमेशा के लिए खो जाए…
जैसे कोई शिक्षक पढ़ाते हुए मौत की ABCD पढ़े,
जैसे कोई सैनिक युद्ध में आखिरी जंग लड़े…
जैसे कोई खिलाड़ी खेल खेल में खाक हो जाए,
ये शरीर इतना जले कि राख हो जाए…
जैसे कोई गुमनाम किसी और दुनिया में मशहूर हो जाए,
कोई खोज ना पाए इतना दूर हो जाए…
जैसे कोई लेखक अपनी कलम से मौत लिख ले,
जैसे कोई अदाकार कभी ना उठने की कला सीख ले…
जैसे कोई संगीतकार आखिरी राग छेड़े,
जैसे कोई शिकारी जंगलों में बाघ छेड़े…
सही काम में डूबना ऐसा है…
कि पता भी ना चले और खुदा के नाम हो जाए,
काम करते करते ही काम तमाम हो जाए…